कविता ‘मौत से ठन गई

https://youtu.be/hq5X04jIXWY ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन … Continue reading कविता ‘मौत से ठन गई


I've come here with the age of four days, Two get spend in wishing of all, And rest in waiting, Now day have been passed, And I feel as I have entered in final evening! 'With the instrumental song of mourning No more run to forwards neither anyone's behind, No move through the young, delicate … Continue reading Poetry