जीवन की औपचारिकता

टीवी न्यूज़ देखती हूँ तो घबराहट होने लगती है, वेब सीरीज़ में समझ ही नहीं आता देखें क्या सब एक से बढ़कर एक उबाऊ और एक-रूप से कार्यक्रम, धारावाहिक देखकर बहुत अधिक ही बोरियत हो जाती है, परन्तु जब किताबें कहानियाँ पढ़ती हूँ तो सब पीछे छूटने लगता है, मानो मेरा होना कहीं खोने सा … Continue reading जीवन की औपचारिकता