आज एक पतंग को उड़ते देखा

आज एक पतंग को उड़ते देखा, वैसे तो देखा कई बार था मगर आज ग़ौर किया उड़ते पंछियों को अक्सर देखती थी पर आज एक पतंग को उड़ते देखा, कुछ अलग सी बात थी उसमें बहुत ज़ोर की चाह आसमान को छू लेने की शायद, अकेले आसमान में सबसे ऊँचाई पर कोई पंछी भी नहीं [...]

जुर्म क्या था हमारा?

इन मासूम नज़रों में दहकते सवाल हैं अनेकों हाँ ये मर चूके हैं मगर ज़िन्दों से ज़्यादा सवाल मुर्दे पूछते हैं क्योंकि उन्हें कोई ख़ौफ़ नहीं होता है, और आज ये पूछ रहें हैं किसने मारा हमें और जुर्म क्या था हमारा? तो शायद यही जवाब होगा ••• सबसे बड़ा जुर्म है इस दुनिया में [...]

आँखें उसकी…

वो बात नहीं करता लवों से पर उसका क्या जो आँखें उसकी इतना कुछ कह जाती हैं ढूँढती हैं थक जाती हैं देख के चेहरे को एक ही क्यूँ सुकून पाती हैं कभी शिकायत करती हैं कभी अपनापन जताती हैं तो कभी फेंर के नज़रों को नाराज़ भी हो जाती हैं वो चुप खड़ा रहता [...]

फिर क्या

घर से निकला था कुछ करने को भीड़ से अलग होने को पर जिस भी ओर अकेले चलने को सोचा सामने एक मजमा पहले से खड़ा पाया, फिर क्या वहाँ रूकता तो मैं कहाँ रहता गुम हो जाता या किसी के पैरों तले कुचला जाता इसी डर से वापस घर लौट आया @NidhiSuryavansi

डायरी अधूरी यादों की

डायरी अधूरी यादों की उसकी पुरानी बातों की है जिसमें लिखी उसने कहानी अपने बचपन की खो-खो की बारिश में तैरती काग़ज़ की नावों की उसके खेतों की उसके गाँवों की... कहानी, उसके धूप की उसके छावों की दास्ताँ मुश्किल सफ़र के उसकी दुखते कंधे नगें पाँवों की। कल माँ की बहुत पुरानी डायरी निकाली [...]

वक़्त ही तो था

वक़्त ही तो था जो गुजर गया आज़ादी के साए में कोई रिवायत होती तो चली आती। चाहे कुचलती वो कितनी उम्मीदों कितने नए सपनों को, जला देती उड़ने को बेसब्र उन परिंदों के पंखों को। पर आज मुकम्मल तो कहलाती हाँ कोई नए घरौंदें नहीं बनते, नए मेहमान नहीं आते लोग अपनों से बे-कैफ़ी [...]