The Traveler

Raaste me h abhi…

Chl chuke ab tk lakhoṅ mil,

 Phir bhi mazboor h ye dil,

Kahne ko,

Ha raaste me h abhi!

Ja rhe h kha? 

Khuch pana h,

Accha kya? 

Khuch bhi, 

Pta nhi pr khuch to hoga hi…

Chal rahe h tab hi!

Hm to raaste me h abhi!

Ek pl roya h Yha,

Ek pal khoya h Yha,

Suna tha kabhi bas ek pal ka safar h,

Yha pal chhoro, kai Sadiya gujar gayi,

Mai sukoon se soya hi nhi!

Kyu ?

Kyonki raaste me h abhi…

Accha Ha yaad aaya,

Kb thamega ye safar, kb rukega ye kadam,

Kb ek lambi aah bharoge karke in aaṅkhoṅ ko bnd,

Kb jioge ye zindagi,

Zindagi ???

Ha zindagi,

Ye kya h ?

Hamne to kabhi jana hi nhi,

Kyu?

Kyonki raaste me h abhi…

Accha Ha bhool jata hu baar baar ab yaadast khuch kamjor si ho gayi,

Ha to sahab zindagi wo h jo aapko jine ke liye mili thi kabhi,

Khair, aap to raaste me h abhi,

Pahuchiyega jb khI kisi manzil pr to ji lijiega thoṛi si zindagi,

Kahte h khuda ke khoobasoorat tohafe si h,

H Khuch phoolo. Ki bhini-bhini mahak si,

Dil me uṭhti us ajeeb kasak si,

Or kabhi thandi hawa ke jhoko si,

Bachpan me khelte us kho-kho si,

Or kabhi Raat ki chadar me chupi chaṅdni si,

Khuch khuch Rimjhim baarish si,

Phir h kabhi ye dhalti shaam si,

Or kabhi ootho pe bikhri wo halki muskaan si,

To kabhi Subha-Subha pachhiyo ki chahchati awaj si,

Khuch khuch adarc ki chai, or aaj ke akhbaar si,

Kahte h Khuch aisi si h zindagi,

Khair, aap to raaste me h abhi…

Nidhi singh 

Hindi Translation-

रास्ते में हैं अभी…

चल चूके अब तक लाखों मील,

फिर भी मजबूर है ये दिल,

कहने को, हाँ रास्ते में हैं अभी।

जा रहें हैं कहाँ ? 

कुछ पाना है, 

अच्छा क्या?

कुछ भी…

पता नहीं पर कुछ तो होगा ही,

चल रहें है तभी,

हम तो रास्ते में हैं अभी।

एक पल रोया है यहाँ,

एक पल खोया है यहाँ,

सुना था कभी बस एक पल का सफ़र है,

एक पल तो छोड़ो, कई सदियाँ गुज़र गयी,

मैं सुकून से सोया ही नहीं।

क्यूँ ?

क्योंकि रास्ते में हैं अभी…

अच्छा हाँ याद आया।

कब थमेगा ये सफ़र, कब रूकेगा ये क़दम,

कब एक लम्बी आँह भरोगे करके इन आँखों को बन्द।

कब जियोगे ये ज़िन्दगी…

ज़िन्दगी ???

हाँ ज़िन्दगी।

ये क्या है?

हमने तो कभी जाना ही नहीं,

क्यूँ?

क्योंकि रास्ते में हैं अभी।

अच्छा हाँ भूल जाता हूँ बार-बार अब याददाश्त कुछ कमज़ोर सी हो गयी,

हाँ तो साहब ज़िन्दगी वो है जो आपको जिने के लिये मिली थी कभी,

ख़ैर, आप तो रास्ते में हैं अभी।

पहुँचियेगा जब कहीं किसी मन्जिल पर तो जी लिजियेगा,

थोड़ी सी ज़िन्दगी,

कहते हैं खुदा के ख़ूबसूरत तोहफ़े सी है,

है कुछ फूलों की भिनी-भिनी महक सी,

कभी दिल में उठती उस अजीब कसक सी,

और कभी ठंडी हवा के झोंकों सी,

बचपन में खेलते उस खो-खो सी,

और कभी रात की चादर में छुपी चाँदनी सी,

कुछ-कुछ रिमझिम बारिश सी,

फिर है कभी ये ढलती शाम सी,

और कभी ओठों पे बिखरी वो हल्की मुस्कान सी,

तो कभी सुबह -सुबह पक्षीयों की चहचहाती आवाज़ सी,

कुछ-कुछ अदरक की चाय, और आज के अख़बार सी,

कहते हैं कुछ ऐसी सी है ये ज़िन्दगी,

ख़ैर, आप तो रास्ते में हैं अभी।

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